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भारत का सर्वोच्च न्यायालय 
भारत का सर्वोच्च न्यायालय देश का सबसे ऊँचा न्यायालय है जैसा कि भारत के संविधान के भाग 5, अध्याय 4 स्थापित है। भारत के संविधान के अनुसार, भारत के सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका संघीय न्यायालय की तरह है, वह संविधान के संरक्षक और अपील का सबसे ऊँचा न्यायालय है।


भारत के उच्च न्यायालय
उच्च न्यायालय राज्य में मौलिक न्याय सीमा के सिविल न्यायालय हैं और वे प्राणदण्ड योग्य समेत सभी अपराधों की जाँच कर सकते हैं। अधिकांश उच्च न्यायालयों का भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 की शर्तों के अनुसार निचली अदालतों से अपील और याचिका प्रार्थना से युक्त होता है।


भारत के जिला न्यायालय
भारत के जिला न्यायालय की अध्यक्षता एक न्यायाधीश द्वारा होती है। वे जिला स्तर पर भारत में न्याय का प्रशासन करते हैं। ये न्यायालय राज्य के उच्च न्यायालय जिसकों वह रखता है, के प्रशासनिक और न्यायिक नियंत्रण में होते हैं।


ट्रिब्यूनल
ट्रिब्यूनल न्यायिक रूप से कार्यकर ही निकाय के लिए एक जातिगत पद है, चाहे वह शीर्षक रूप मे ट्रिब्यूनल कहा जाता है या नहीं। उदाहरण के लिए- न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत एक अधिवक्ता जिस पर अकेला न्यायाधीश बैठा है, उस न्यायाधीश को ’’उनका ट्रिब्यूनल’’ कहा जा सकता है।